<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><!-- Generated on Fri, 06 Nov 2009 09:34:54 +0300 --><rss version="2.0" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"> <channel> <atom:link href="http://www.islamhouse.com/RSS/IslamHouse-all-HI-HI.xml" rel="self" type="application/rss+xml" /> <title>islamhouse.com :: समस्त :: हिन्दी</title> <link>http://www.islamhouse.com/RSS/IslamHouse-all-HI-HI.xml</link> <description>islamhouse.com :: समस्त</description> <language>HI</language> <managingEditor>admin@islamhouse.com</managingEditor> <pubDate>Fri, 06 Nov 2009 09:34:54 +0300</pubDate> <lastBuildDate>Fri, 06 Nov 2009 09:34:54 +0300</lastBuildDate> <generator>islamhouse.com</generator> <ttl>60</ttl> <image> <url>http://www.islamhouse.com/log_rss.jpg</url> <title>islamhouse.com</title> <link>http://www.islamhouse.com/</link> <width>108</width> <height>108</height> <description>islamhouse.com</description> </image> <item> <title>क़ारी सलाह हाशिम की आवाज़ में मुरत्तल तिलावते क़ुर्आन करीम का अल्बम - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ क़ारी सलाह हाशिम की आवाज़ में मुरत्तल तिलावते क़ुर्आन करीम का अल्बम, वह कुवैत में मस्जिदुद्दौला अल-कबीर के इमामों में से एक हैं, वह सुन्दर आवाज़ वाले एक उत्कृष्ट क़ारी हैं, यह संस्करण mp3 फार्मेट में 128 केबी प्रति सेकण्ड के उच्च गुणवत्ता के साथ है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/242961</link> <pubDate>Mon, 12 Oct 2009 20:10:38</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/242961</guid> </item> <item> <title>इस्लाम में आर्थिक स्थिति की एक झलक - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ धन जीवन की रीढ़ की हड्डी और उसका आधार है, जिसके द्वारा इस्लामी शरीअत का उद्देश्य एक संतुलित समाज की स्थापना है जिस में सामाजिक न्याय का बोल बाला हो जो अपना तभी सदस्यों के लिए आदरणीय जीवन का प्रबंध करता है। और जब इस्लाम की दृष्टि में धन उन आवश्यकताओं में से एक है जिस से व्यक्ति या समूह बेनियाज़ नहीं हो सकते, तो अल्लाह तआला ने उसके कमाने और खर्च करने के तरीक़ों से संबंधित कुछ नियम बनाये हैं। इस लेख में संछिप्त रूप से उसी का उल्लेख किया गया है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/242958</link> <pubDate>Mon, 12 Oct 2009 19:10:03</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/242958</guid> </item> <item> <title>ज़कात की वैद्धता की हिक्मत (तत्वदर्शिता) - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ क्या ज़कात के वैध किये जाने की कोई निश्चित हिक्मत (तत्वदर्शिता) है? ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/242956</link> <pubDate>Mon, 12 Oct 2009 19:10:38</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/242956</guid> </item> <item> <title>जन सेवा और इस्लाम - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ इस्लाम एक संपूर्ण और व्यापक धर्म है, जिस ने दीन और दुनिया, लोक और परलोक, तथा जीवन के सभी वर्गों में मानव जाति की आवश्यकताओं की पूर्ति की है और उसकी समस्त समसयाओं का उचित समाधान पेश किया है। इस्लाम धर्म की विभिन्न विशेषताओं और गुणों में से एक मानव अधिकार की रक्षा है, जिसका एक महत्वपूर्ण छेत्र जन सेवा है। प्रस्तुत पुस्तक में विस्तारपूर्वक इस्लाम में जन सेवा की कल्पना के विषय पर वार्तालाप किया गया है। इस्लाम ने जिस व्यापक रूप से जन सेवा को परिभाषित किया, उसका महत्व स्पष्ट किया, अपने मानने वालों को इसकी प्रेरणा दी, सेवा के अधिकारी लोगों को सुनिश्चित किया, और जिस प्रकार आध्यात्मिक और नैतिक आधारों पर इसका सुदृढ़ क़ानूनी ढाँचा खड़ा किया है वह अद्वितीय है, बल्कि इसे ईश्वर उपासना और धार्मिक कर्तव्य से संबंधित कर के अनन्त बना दिया। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/242381</link> <pubDate>Mon, 12 Oct 2009 18:10:07</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/242381</guid> </item> <item> <title>क़ारी मिशारी बिन राशिद अल-अफासी का मुरत्तल तिलावते क़ुर्आन करीम का अल्बम अंग्रेजी अनुवाद के साथ - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ क़ारी मिशारी बिन राशिद अल-अफासी का यह मुरत्तल तिलावते क़ुर्आन करीम का अल्बम, भाई इब्राहिम वूक की आवाज में अंग्रेजी भाषा में क़ुरआन करीम के अर्थ के अनुवाद के साथ है, यह संस्करण mp3 फार्मेट में 128 केबी प्रति सेकण्ड के उच्च गुणवत्ता के साथ है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/242264</link> <pubDate>Mon, 12 Oct 2009 17:10:52</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/242264</guid> </item> <item> <title>शैख अली बिन अब्दुर्रहमान अल-हुज़ैफी की आवाज़ में नाफे से क़ालून की रिवायत के अनुसार मुरत्तल तिला - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ मस्जिदे-नबवी के इमाम शैख अली बिन अब्दुर्रहमान अल-हुज़ैफी की आवाज़ में नाफे से क़ालून की रिवायत के अनुसार मुरत्तल तिलावते क़ुर्आन करीम, यह अल्बम पवित्र क़ुर्आन करीम मुद्रण हेतु शाह फहद कम्पलेक्स का उत्पादन है, यह संस्करण शुद्ध आवाज़ और mp3 फार्मेट में 128 केबी प्रति सेकण्ड के उच्च गुणवत्ता के साथ विशिष्ट है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/242149</link> <pubDate>Mon, 12 Oct 2009 16:10:43</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/242149</guid> </item> <item> <title>शैख अली बिन अब्दुर्रहमान अल-हुज़ैफी की आवाज़ में नाफे से क़ालून की रिवायत के अनुसार मुरत्तल तिला - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ मस्जिदे-नबवी के इमाम शैख अली बिन अब्दुर्रहमान अल-हुज़ैफी की आवाज़ में नाफे से क़ालून की रिवायत के अनुसार मुरत्तल तिलावते क़ुर्आन करीम, यह अल्बम पवित्र क़ुर्आन करीम मुद्रण हेतु शाह फहद कम्पलेक्स का उत्पादन है, यह संस्करण शुद्ध आवाज़ और mp3 फार्मेट में 128 केबी प्रति सेकण्ड के उच्च गुणवत्ता के साथ विशिष्ट है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/242036</link> <pubDate>Mon, 12 Oct 2009 16:10:43</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/242036</guid> </item> <item> <title>शैख अली बिन अब्दुर्रहमान अल-हुज़ैफी की आवाज़ में नाफे से क़ालून की रिवायत के अनुसार मुरत्तल तिला - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ मस्जिदे-नबवी के इमाम शैख अली बिन अब्दुर्रहमान अल-हुज़ैफी की आवाज़ में नाफे से क़ालून की रिवायत के अनुसार मुरत्तल तिलावते क़ुर्आन करीम, यह अल्बम पवित्र क़ुर्आन करीम मुद्रण हेतु शाह फहद कम्पलेक्स का उत्पादन है, यह संस्करण शुद्ध आवाज़ और mp3 फार्मेट में 128 केबी प्रति सेकण्ड के उच्च गुणवत्ता के साथ विशिष्ट है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/241923</link> <pubDate>Mon, 12 Oct 2009 16:10:43</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/241923</guid> </item> <item> <title>ज़कातुल फित्र की मात्रा और उसके निकालने का समय - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ हम एक मोरक्को संघ के सदस्य बार्सिलोना में रहते हैं, वह कौन सा तरीक़ा है जिस से हम ज़कातुल फित्र की गणना करें? ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/233106</link> <pubDate>Thu, 17 Sep 2009 18:09:41</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/233106</guid> </item> <item> <title>ज़कात के अहकाम - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ ज़कात इस्लाम के कर्तव्यों में से एक महान कर्तव्य और उसका तीसरा महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसे अल्लाह तआला अपनी किताब में अनिवार्य किया है और अल्लाह के पैग़ंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने स्वयं ज़कात वसूल किया है और जिस पर ज़कात अनिवार्य है उस से वसूल करने का आदेश दिया है। इस लेख में ज़कात का हुक्म, उसके अनिवार्य होने प्रमाण, उसको रोकने या उसमें कंजूसी करने वाले के हुक्म का उल्लेख किया गया है। तथा जिन धनों में ज़कात अनिवार्य उनके प्रकार, उनका निसाब, अनिवार्य मात्रा, ज़कात निकालने का तरीक़ा और उसके हक़दार लोगों का वर्णन किया गया है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/232757</link> <pubDate>Thu, 10 Sep 2009 08:09:25</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/232757</guid> </item> <item> <title>रमज़ान से लाभान्वित पाठ - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ इस लेख में रमज़ान से लाभान्वित होने वाले कुछ पाठ का निम्नलिखित बिन्दुओं के द्वारा उल्लेख किया गया है : 1- रमज़ान सब्र (धैर्य) का महीना है 2- रमज़ान दानशीलता, एहसान व भलाई और सिला-रहमी (रिश्तेदारी निभाने) का महीना है 3- रमज़ान जिहाद, विजय और फुतूहात का महीना है 4- रमज़ान क़ुरआन और क़ियामुल्लैल का महीना है 5- रमज़ान भाईचारा और प्रेम का महीना है 6- रमज़ान गुनाहों की माफ़ी और नरक से मुक्ति का महीना है 7- रमज़ान तौबा और तक्वा का महीना है 8- रमज़ान इख्लास और सच्चाई का महीना है ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/232450</link> <pubDate>Tue, 08 Sep 2009 13:09:23</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/232450</guid> </item> <item> <title>पवित्र क़ुर्आन की तिलावत करने की फज़ीलत - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ पवित्र क़ुर्आन मानवता के नाम अल्लाह का सर्व कालिक और अन्तिम संदेश है, जो मानवता की लौकिक और पारलौकिक हितों के मार्गदर्शन पर आधारित है, जो सत्य और असत्य, मार्गदर्शन और पथभ्रष्टता, सौभाग्य और दुर्भाग्य के बीच अन्तर स्पष्ट करता है। वह महीना जिस में मानवता को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ, वह रमज़ान का ही शुभ महीना है। इसलिये हमारे अति उचित है कि हम विशेष रूप इस मुबारक महीने में इस महान ग्रंथ का पाठ करने, उसे पढ़ने-पढ़ाने, सीखने-सिखाने, उसमें मननचिंतन करने और उसके अनुसार कार्य करने पर भरपूर ध्यान दें। इस पर हमें क्या लाभ मिलेगा ? पढ़िये इस लेख में। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/231983</link> <pubDate>Wed, 02 Sep 2009 23:09:27</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/231983</guid> </item> <item> <title>तरावीह की नमाज़ का हुक्म - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ इस लेख मे तरावीह की नमाज़ का हुक्म, उसकी फज़ीलत, उसकी रक्अतों की संख्या और उसकी अदायगी का मस्नून तरीक़ा उल्लेख किया गया है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/230519</link> <pubDate>Fri, 14 Aug 2009 17:08:07</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/230519</guid> </item> <item> <title>बीमार और मुसाफिर के रोज़े का हुक्म - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ इस्लाम के गुणों में से एक महान गुण यह भी है कि उसने लोगों की आवश्यकताओं और उनकी परिस्थितियों का बहुत ध्यान रखा है और जहाँ भी उन्हें कठिनाई और कष्ट का सामना होता है, वहाँ उनके लिए आसानी का नियम और संविधान पस्तुत करता है, उन्हीं में से एक बीमार और मुसाफिर के रोज़े का मस्अला भी है। इस लेख मे बीमार और मुसाफिर के रोज़े का हुक्म तथा बीमारी और सफर के विभिन्न प्रकार उल्लेख किये गये है जिनमें उनके लिए रोज़ा तोड़ने की रूख्सत प्राप्त होती है या उन्हें इसकी छूट नहीं मिलती है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/230517</link> <pubDate>Fri, 14 Aug 2009 17:08:48</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/230517</guid> </item> <item> <title>रोज़ा की हिक्मतें और उसके फायदे - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ रोज़ा –व्रत-जिसे अल्लाह तआला ने अपने बंदों पर अनिवार्य किया है, उसके अंदर बहुत बड़ी तत्वदर्शिता और ढेर सारे फायदे और लाभ हैं, जिन से एक रोज़ा रखने वाला लाभान्वित होता है। इस लेख में इसी का उल्लेख किया गया है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/230515</link> <pubDate>Fri, 14 Aug 2009 17:08:41</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/230515</guid> </item> <item> <title>क्या यूरोपीय परिषद का पालन करें यद्यपि वह खगोलीय गणना पर चलती हो? - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ हम, ब्रिटेन में एक इस्लामी केन्द्र के प्रबंधक, यह चाहते हैं कि अपने केन्द्र में नमाज़ियों के लिए पवित्र रमज़ान के महीने की शुरूआत और अन्त की एक तिथि निर्धारित कर दें, हमारा लक्ष्य मुसलमानों को एकजुट करने का प्रयास है इस प्रकार कि इस विषय पर उनके विचार को एकजुट करने के लिए हम हर सम्भव प्रयास करते हैं, उन में से कुछ का दृष्टिकोण चाँद के दर्शन का एतिबार करना है, और कुछ लोगों का विचार खगोलीय गणना का पालन करने का है। और यूरोपीय फत्वा परिषद का भी इस विषय में एक विचार है, जबकि ज्ञात होना चाहिए कि यूरोप में मुसलमानों के लिए यही परिषद फत्वा जारी करती है। हमारा प्रश्न यह है कि : क्या हमें यूरोपीय परिषद का पालन करना चाहिए यद्यपि वह खगोलीय गणना पर चलती हो? या कि हम ने अपने नगर की मिस्जदों में मुसलमानों को एकजुट करने का जो प्रयास किया है उसी पर बाक़ी रहें यद्यपि वह यूरोपीय परिषद के विचार के विरूद्ध हो? ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/230513</link> <pubDate>Fri, 14 Aug 2009 16:08:47</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/230513</guid> </item> <item> <title>मुस्लिम समुदाय की एकता को सुनिश्चित करने हेतु सभी मताले को मक्का के मताले से संबंधति करना - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ कुछ लोग रमज़ान के महीने के प्रवेश करने (प्रारम्भ होने) इत्यादि में उम्मत की एकता और अखण्डता को सुनिश्चित करने के लिए इस बात का मुतालबा करते हैं कि समस्त मताले (चाँद के उगने के स्थान) को मक्का के मताले से संबंधित कर दिया जाए, इस विषय में आपका क्या विचार है? ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/230497</link> <pubDate>Fri, 14 Aug 2009 12:08:49</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/230497</guid> </item> <item> <title>रोज़े का हुक्म - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ इस लेख में क़ुरआन, हदीस और मुसलमानों की सर्वसम्मति के द्वारा रोज़े का हुक्म, तथा किन लोगों पर रोज़ा अनिवार्य है और इस फ़रीज़ा का इनकार करने वाले का हुक्म उल्लेख किया गया है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/230126</link> <pubDate>Tue, 11 Aug 2009 10:08:46</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/230126</guid> </item> <item> <title>इस्लाम एक दृष्टि में - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ इस्लाम क्या है? उसकी वास्तविकता और उसका उद्देश्य क्या है? उसके मूल तत्व और उसकी मौलिक शिक्षाएँ क्या हैं? मानव को वह कौन सा दृष्टिकोण देता, किस चरित्र और आचरण पर उभारता और किस प्रकार का जीवन गुज़ारने का निर्देश देता है? यह पुस्तक इन्हीं बिन्दुओं को सामने रख कर लिखी गई है और यह प्रयास किया गया है कि जो लोग मुसलमान होने के उपरांत भी शुद्ध रूप् से इस्लाम की वास्तविकता को नहीं जानते, वे इस पुस्तक के अध्ययन से मौलिक और आवश्यक सीमा तक, इस्लाम की वास्तविक रूप-रेखा को जान लें। विशष्टि रूप से इस्लाम में उपासन के व्यापक और विस्तृत अर्थ का खुलासा किया गया है, जो कि केवल वैयक्तिक जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तव में जीवन के सभी अंशों और पक्षों को सम्मिलित है, चाहे वह आध्यात्मिक हो, या नैतिक, पारिवारिक हो या सामाजिक, राजनैतिक हो या आर्थिक। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/230124</link> <pubDate>Tue, 11 Aug 2009 09:08:01</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/230124</guid> </item> <item> <title>क़ारी मुहम्मद सिद्दीक़ अल-मिन्शावी की आवाज़ में मुरत्तल तिलावते क़ुर्आन करीम का अल्बम उर्दू अनु - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ क़ारी मुहम्मद सिद्दीक़ अल-मिन्शावी की आवाज़ में मुरत्तल तिलावते क़ुर्आन करीम का यह अल्बम, शैख मेराज रब्बानी की आवाज़ में क़ुर्आन करीम के अर्थ के उर्दू अनुवाद के साथ है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/228261</link> <pubDate>Thu, 30 Jul 2009 23:07:26</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/228261</guid> </item> <item> <title>ग़लतफ़हमियों का निवारण (इस्लाम के बारे में ग़ैर मुस्लिमों के सामान्य प्रश्नों के उत्तर) - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ इस पुस्तक में इस्लाम से संबंधित ग़ैर-मुस्लिमों के द्वारा पूछे जाने वाले 20 सामान्य प्रश्नों के प्रमाणों और तर्क के साथ उत्तर दिये गये हैं। यदि एक मुसलमान इन प्रश्नों के उत्तर अच्छी तरह समझ ले और इन्हें अपने दिमाग में बिठा ले, तो वह ग़ैर-मुस्लिमों के मस्तिष्कि में इस्लाम के संबंध में पाई जाने वाली ग़लतफ़हमियों को दूर करने और इस्लाम के प्रति उनके नकारात्मक सोच को बदलने में सफल रहेगा। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/223549</link> <pubDate>Fri, 17 Jul 2009 15:07:36</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/223549</guid> </item> <item> <title>इस्लाम में परदा और नारी की हैसियत - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ सामूहिक जीवन में औरत और मर्द का संबंध किस तरह होना चाहिए, यह इंसानी सभ्यता की सब से अधिक पेचीदा और सब से अहम समस्या रही है, जिसके समाधान में बहुत पुराने ज़माने से आज तक दुनिया के सोचने-समझने वाले और विद्वान लोग परेशान हैं, जबकि इसके सही और कामयाब हल पर इंसान की भलाई और तरक्क़ी टिकी हुई है। इतिहास का पन्ना पलटने से पता चलता है कि प्राचीन काल की सभ्याताओं से लेकर आज के आधुनिक पिश्चमी सभ्यता तक किसी ने भी नारी के साथ सम्मान और और न्याय का बर्ताव नहीं किया है! वह सदैव दो अतियों के पाटन के बीच पिसती रही है। इस घोर अंधेरे में उसको रौशनी एक मात्र इस्लाम ने प्रदान किया है, जो सर्व संसार के रचयिता का एक प्राकृतिक धर्म है, जिस ने आकर नारी का सिर ऊँचा किया, उसे जीवन के सभी अधिकार प्रदान किये, समाज में उसका एक स्थान निर्धारित किया और उसके सतीत्व की सुरक्षा की.. इस पुस्तक में इतिहास से मिसालें दे कर यह स्पष्ट किया गिया है कि दुनिया वालों ने नारी के साथ क्या व्यवहार किया और उसके कितने भयंकर प्रमाण सामने आये, इसके विपरीत इस्लाम धर्म ने नारी को क्या सम्मान दिया, उसकी नेचर के अनुकूल उसके लिये जीवन में क्या कार्य-क्षेत्र निर्धारित किये, उसके के रहन-सहन के क्या आचार नियमित किये तथा सामाजिक जीवन में मर्द और औरत के बीच संबंध का किस प्रकार एक संतुलित व्यवस्था प्रस्तुत किया जिसके समान कोई व्यवस्था नहीं। विशेष कर नारी के परदा (हिजाब) के मुद्दे को विस्तार रूप से उठाया गया है और इसके पीछे इस्लाम का उद्देश्य क्या है? उसका खुलासा किया गया है, तथा जो लोग नारी के परदा का कड़ा विरोध और उसका उपहास करते हैं, इसके पीछा उनका उद्देश्य क्या है और यह किस प्रकार उनके रास्ते का काँटा है, इस से भी अवगत कराया गया है। कुल मिलाकर वर्तमान समय के हर मुसलमान बल्कि हर बुद्धिमान को इस पुस्तक का अध्ययन करना चाहिए। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/223546</link> <pubDate>Fri, 17 Jul 2009 15:07:40</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/223546</guid> </item> <item> <title>इस्लाम ने समलैंगिकता को क्यों वर्जित किया है? - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ समलैंगिकता (Homosexuality and Lesbianism) को इस्लाम में हराम (वर्जित) क्यों समझा जाता है? मैं जानता हूँ कि यह हराम (निषिद्ध) है किन्तु इसका कारण क्या है? और क़ुर्आन और हदीस में इसके बारे में क्या वर्णन हुआ है? ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/223544</link> <pubDate>Fri, 17 Jul 2009 15:07:00</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/223544</guid> </item> <item> <title>यात्रा से संबंधित कुछ अहकाम - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ यह लेख यात्रा से संबंधित कुछ अहकाम पर आधारित है, जिस में इस्लामी दृष्टिकोण से यात्रा के प्रकार, यात्री को यात्रा के कारण प्रदान की जाने वाली रूख्सतें और आसानियाँ, सफर की रूख्सतों से लाभान्वित होने की शर्तें, सफर के आदाब और ग़ैर इस्लामी देशों का सफर करने की शर्तों पर प्रकाश डाला गया है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/222335</link> <pubDate>Thu, 09 Jul 2009 16:07:27</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/222335</guid> </item> <item> <title>उसमान बिन अफ्फान रज़ियल्लाहु अन्हु के जीवन की कुछ झलकियाँ - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ उसमान बिन अफ्फान रज़ियल्लाहु अन्हु के जीवन की कुछ झलकियाँ : इस लेख में मुसलमानों के तीसरे खलीफी उसमान बिन अफ्फान रज़ियल्लाहु अन्हु की जीवनी, आपकी विशेषताओं और महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में कुछ झलकियाँ प्रस्तुत की गई हैं। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/219309</link> <pubDate>Mon, 15 Jun 2009 21:06:10</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/219309</guid> </item> <item> <title>इस्लाम धर्म के गुण - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ मुसलमान लोग यह गुमान क्यों करते हैं कि उन्हीं का धर्म सच्चा है? क्या उनके पास इसके संतोषजनक कारण हैं? ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/219307</link> <pubDate>Mon, 15 Jun 2009 20:06:17</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/219307</guid> </item> <item> <title>मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और भारतीय धर्म ग्रन्थ - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आगमन की पूर्व सूचना हमें बाइबल, तौरेत और अन्य धर्म ग्रन्थों में मिलती है, यहाँ तक कि भारतीय धर्मग्रम्थों में भी आप के आने की भविष्यवाणियाँ मिलती हैं। हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म की पुस्तकों में इस प्रकार की पूर्व-सूचनाएँ मिलती हैं। इस पुस्तिका में सब को अकत्र करके पेश करने का प्रयास किया गया है। और यह सिद्ध किया गया है कि जिस नराशंस या कल्कि अवतार के आगमन का उनके धर्मग्रन्थों में उल्लेख हुआ है और उसकी जो विशेषतायें वर्णित हुई हैं, वह इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ही हैं। इसलिए जीवन की सुगम, सार्थक, सफल और फलदाई यात्रा के लिए अल्लाह के अन्तिम पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के द्वारा पेश की गई शिक्षाओं को अपनाया जाए और उनके बताये हुए मार्ग पर चला जाए। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/219303</link> <pubDate>Mon, 15 Jun 2009 19:06:31</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/219303</guid> </item> <item> <title>आप की अमानत (आप की सेवा में) - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ आज लाखों करोड़ों आदमी आग का ईंधन बनने की होड़ में लगे हुए हैं, और ऐसे मार्ग पर चल रहे हैं जो सीधे नरक की ओर जाता है। इस वातावरण में उन तमाम लोगों का दायित्व है जो मानव समूह से प्रेम करते हैं और मानवता में आस्था रखते हैं कि वे आगे आयें और नरक में गिर रहे इंतानों को बचाने का अपना कर्तव्य पूरा करें। यह पुस्तिका इसी संदर्भ में एक अहम प्रयास है जिस में लेखक ने मानवता के प्रति अपने प्रेम और स्नेह के कुछ फूल प्रस्तुत किये हैं और इसके माध्यम से उन्हों ने अपना वह कर्तव्य पूरा किया है जो एक सच्चे मुसलमान होने के नाते हम सब पर है। इस्लाम की दौलत एक बहुत बड़ा धरोहर है जिसे हर एक तक पहुँचाना प्रत्येक सच्चे मुसलमान का कर्तव्य है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/219299</link> <pubDate>Mon, 15 Jun 2009 19:06:41</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/219299</guid> </item> <item> <title>क़ादियानियत की हक़ीकत - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ क़ादियानियत की हक़ीकत : यह पुस्तक क़ादियानियत के असली चेहरे को बेनक़ाब करती है, जो मुस्लिम समाज में घुस कर अपने आप को एक सच्चे मुसलमान के रूप में पेश करते हैं और अपने दुष्ट इरादों को छुपाये रखते हैं, जिसके कारण सीधे-साधे कम इल्म वाले मुसलमान आसानी से उनके झांसे में आ जाते हैं। जबकि इनके इरादे बड़े भयानक और खतरनाक हैं, इसलिए आम मुसलमानों को इन से अवगत कराना आवश्यक है। प्रस्तुत किताब का उद्देश्य यही है, जिसमें क़ादियानियत के संस्थापक की संक्षिप्त जीवनी, क़ादियानियत के अक़ाईद (आस्थाओं और मान्यताओं) मिज़ाZ गुलाम अहमद के दावों, इल्हामात, तावीलों, भविष्यवाणियों, मुसलमानों के बारे में उनके अक़ीदे, जिहाद और हज्ज के प्रति उनके रवैये का खुलासा करते हुए, क़ादियानियत की हक़ीक़त का फर्दा फाश किया गया है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/219296</link> <pubDate>Mon, 15 Jun 2009 19:06:39</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/219296</guid> </item> <item> <title>क़ारी अब्दुल बासित मुहम्मद अब्दुस्समद की वर्श द्वारा नाफेअ अल-मदनी की रिवायत के अनुसार तिलावते  - हिन्दी</title> <description><![CDATA[ क़ारी अब्दुल बासित मुहम्मद अब्दुस्समद की वर्श द्वारा नाफेअ अल-मदनी की रिवायत के अनुसार शातबिया के तरीक़ से है तिलावते क़ुर्आन करीम का यह अल्बम है जो mp3 फार्मेट में 128 केबी प्रति सेकण्ड है। ]]></description> <link>http://www.islamhouse.com/p/218933</link> <pubDate>Sat, 13 Jun 2009 11:06:57</pubDate> <guid isPermaLink="true">http://www.islamhouse.com/p/218933</guid> </item> </channel></rss>