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    <title><![CDATA[ islamhouse.com :: समस्त :: हिन्दी ]]></title>
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    <description>islamhouse.com :: समस्त</description>
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    <pubDate>Wed, 22 May 2013 02:50:10 -0500</pubDate>
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      <title><![CDATA[ अपने बच्चे को पैगंबर की कहानी सुनायें - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ अपने बच्चे को पैगंबर की कहानी सुनायें: इस पुस्तिका में हमारे प्रिय पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के बचपन से संबंधित कहानियों का एक समूह प्रस्तुत किया गया है, जिन्हें बच्चों को सुनाना उचित है। ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/422954/hi/hi/books/अपने_बच्चे_को_पैगंबर_की_कहानी_सुनायें]]></link>
      <pubDate>Tue, 30 Apr 2013 03:04:59 +0300</pubDate>
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      <title><![CDATA[ सुन्नत पर चलने का महत्व - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ सुन्नत पर चलने का महत्व ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/422387/hi/hi/videos/सुन्नत_पर_चलने_का_महत्व]]></link>
      <pubDate>Thu, 25 Apr 2013 12:04:48 +0300</pubDate>
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      <title><![CDATA[ मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का ईश्दूतत्व और मानव को उसकी आवश्यकता - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ इस ऑडियो में इस बात का उल्लेख किया गया है किस तरह मानव समाज में ईश्दूतों के अवतरण की शुरूआत हुई और विकास करते हुए एक महान संदेष्टा के ईश्दूतत्व पर संपन्न हो गयी - और वह समस्त ईश्दूतों व संदेष्टाओं के नायक मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं। तथा ईश्दूतत्व के संक्षेप इतिहास का वर्णन करते हुए हमारे अंतिम संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ईश्दूतत्व, उनके अवतरण के समय धार्मिक व सामाजिक स्थितियों, उनके गुणों, पवित चरित्र, जीवन की घटनाओं, कठिन परिस्थियों, उनकी जाति के लोगों का आपके साथ दुर्व्यवहार और आपका उनके साथ सदव्यवहार का उल्लेख किया गया है। इसी तरह पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ईश्दूतत्व की सच्चाई, उसके प्रमाणों का चर्चा करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि आप पर ईश्दूतत्व का समापन हो जाता है। अतएव, आप अब परलोक तक सर्वमानवजाति के लिए अल्लाह के ईश्दूत व संदेष्टा हैं और सबके लिए आपका अनुपालन करना अनिवार्य है। ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/422373/hi/hi/audios/मुहम्मद_सल्लल्लाहु_अलैहि_व_सल्लम_का_ईश्दूतत्व_और_मानव_को_उसकी_आवश्यकता]]></link>
      <pubDate>Thu, 25 Apr 2013 10:04:15 +0300</pubDate>
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      <title><![CDATA[ इस्लाम के सिद्धान्त - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ इसलाम के सिद्धान्त : इस ऑडियो में इस्लाम धर्म के नामकरण का कारण, इस्लाम शब्द का अर्थ, इस्लाम और कुफ्र की वास्तविकता, कुफ्र की हानियाँ और उसके दुष्ट परिणाम तथा इस्लाम में प्रवेश करने के लाभ का चर्चा करते हुए, यह स्पष्ट किया गया है कि मनुष्य को अल्लाह के आज्ञापालन के लिए, अल्लाह के अस्तित्व, उसके गुणों और पसंदीदा तरीक़ों को जानने की ज़रूरत है। तथा उसके इस ज्ञान को विश्वास व यक़ीन के सर्वोच्च स्तर पर पहुँचा हुआ होना चाहिए। तथा मनुष्य को इस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए स्वयं कोशिश नहीं करनी है, बल्कि अल्लाह ने अपने कुछ बंदों को इस मकान कार्य के लिए स्वयं चयन कर लिया है, और उन्हें यह ज्ञान प्रदान करके, उसे अपने सभी बंदों तक पहुँचाने का आदेश दिया है। अब बंदों को चाहिए के अल्लाह के चयनित सत्यवादी संदेष्टाओं को पहचानें, उन पर ईमान लायें, उनकी बातों को सुनों और उनकी शिक्षाओं और निर्देशों के अनुसार जीवन बितायें। इसके अलावा मनुष्य के लिए अल्लाह की अज्ञाकारिता का कोई अन्य रास्ता नहीं है। ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/422371/hi/hi/audios/इस्लाम_के_सिद्धान्त]]></link>
      <pubDate>Thu, 25 Apr 2013 10:04:01 +0300</pubDate>
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      <title><![CDATA[ अल्लाह पर ईमान और एकेश्वरवाद की वास्तविकता - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ इस ऑडयिों में उन बातों का उल्लेख किया गया है जिन पर हमारे संदेष्टा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें ईमान लाने का आदेश दिया है, और उनमें सर्व प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण अल्लाह पर ईमान लाना अर्थात ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ का इक़रार करना है। जिस पर इस्लाम की आधारशिला है, और जिसके द्वारा एक मुसलमान के बीच और एक काफिर, मुश्रिक और नास्तिक के बीच अंतर होता है। लेकिन केवल इस कलिमा का उच्चारण मात्र ही काफी नहीं है, बल्कि उसके अर्थ और भाव पर पूरा उतरना ज़रूरी है। इसी तरह ‘इलाह’ (पूज्य) का अर्थ और  ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ की वास्तविकता का उल्लेख करते हुए, मानव जीवन में इस कलिमा के प्रभावों का उल्लेख किया गया है। अंत में उन अवशेष बातों का उल्लेख किया गया है जिन पर ईमान लाने का पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हमें आदेश दिया है, और वे : अल्लाह के फरिश्तों, उसकी पुस्तकों, उसके पैगंबरों, परलोक के दिन, और अच्छी व बुरी तक़्दीर (भाग्य) पर ईमान लाना, हैं। ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/422369/hi/hi/audios/अल्लाह_पर_ईमान_और_एकेश्वरवाद_की_वास्तविकता]]></link>
      <pubDate>Thu, 25 Apr 2013 10:04:18 +0300</pubDate>
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      <title><![CDATA[ अल्लाह सर्वशक्तिमान का सम्मान और उसे गाली देनेवाले का हुक्म - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ अल्लाह सर्वशक्तिमान और उसकी महानता व महिमा से अनभिज्ञ कुछ अवा के यहाँ अल्लाह को गाली देना, बुरा भला कहना और उसे ऐसे शब्दों और गुणों से नामित करना मशहूर हो चुका है जिनका चर्चा करना या उन्हें सुनना एक मुसलमान के लिए बहुत दुलर्भ होता है। और कभी तो इसे ऐसे लोग कहते हैं जो अपने आपको मुसलमान समझते हैं, इसलिए कि वे शहादतैन यानी ला इलाहा इल्लल्लाह और मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह का इक़रार करते हैं। कभी तो कुछ नमाज़ियों से भी ऐसा हो जाता है, और शैतान उनकी ज़ुबानों पर इसे जारी कर देता है। और उनमें से कुछ को शैतान यह पट्टी पढ़ाया है कि वे उसके अर्थ को मुराद नहीं लते हैं, और न ही उससे अपने पैदा करनेवाले का अवमान करना चाहते हैं, तथा उन्हें यह समझाया है कि यह बेकार (तुच्छ) बातों में से है जिस पर ध्यान नहीं दिया जाता! इसी कारण उन्हों ने इसमें लापरवाही से काम लिया है! इस पत्रिका में इस मामले की गंभीरता को बयान किया गया है।  ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419484/hi/hi/books/अल्लाह_सर्वशक्तिमान_का_सम्मान_और_उसे_गाली_देनेवाले_का_हुक्म]]></link>
      <pubDate>Sun, 31 Mar 2013 03:03:38 +0300</pubDate>
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      <title><![CDATA[ वह एक नव मुस्लिम है और अपने पास कुत्ता रखना चाहती है - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ मैं जानती हूँ कि घर में कुत्ता रखना हराम (निषिद्ध) है, किंतु मेरे पास ग्यारह साल से एक कुत्ता है, फिर मैं ने इस्लाम स्वीकार कर लिया, मेरे पास कुत्ता मेरे इस्लाम स्वीकार करने के पूर्व से ही है, तो क्या मेरी नमाज़ क़बूल होगी ॽ जब कुत्ता मर जायेगा तो मैं दूसरा कुत्ता कभी भी नहीं लाऊँगी ; क्योंकि अब मुझे पता है कि यह हराम है। ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419403/hi/hi/fatwa/वह_एक_नव_मुस्लिम_है_और_अपने_पास_कुत्ता_रखना_चाहती_है]]></link>
      <pubDate>Fri, 29 Mar 2013 21:03:53 +0300</pubDate>
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      <title><![CDATA[ क्या उसके लिए आमंत्रण और सदुपदेश के लिए “फेसबुक” में अपनी सूचि में परायी महिलाओं की वृद्धि करना ज - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ क्या यह बात जाइज़ है कि ‘‘फेसबुक” पर मुसलमान आदमी का खाता ग़ैर मह्रम महिलाओं के नामों पर आधारित हो और यह मात्र अल्लाह सर्वशक्तिमान के धर्म की ओर आमंत्रण देने के उद्देश्य से है ?
हमें इस बात से अवगत करायें, अल्लाह तआला आप को लाभ प्रदान करे और आप को बेहतरीन बदला दे। ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419399/hi/hi/fatwa/क्या_उसके_लिए_आमंत्रण_और_सदुपदेश_के_लिए_“फेसबुक”_में_अपनी_सूचि_में_परायी_महिलाओं_की_वृद्धि_करना_ज]]></link>
      <pubDate>Fri, 29 Mar 2013 21:03:56 +0300</pubDate>
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      <title><![CDATA[ एक मुसलमान लड़की को नसीहत जिसे उसके घर वाले नमाज़ और पर्दा करने से रोकते हैं - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ मैं सोलह साल की एक लड़की हूँ, और एक ऐसे परिवार से हूँ जो धर्म के प्रति प्रतिबद्ध नहीं हैं, मैं एक अकेली हूँ जो नमाज़ पढ़ती हूँ और इस्लाम की शिक्षाओं का पालन करने का प्रयास करती हूं, इसीलिए मुझे बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, उन्हीं में से यह है कि मेरी माँ मुझे इशा और फज्र की नमाज़ पढ़ने से रोकती है और कहती है कि वे दोनों अनुचित समय में हैं !! इसके बावजूद मैं उन्हें चुपके से पढ़ लेती हूं, और यदि वह मुझसे आकर पूछती है तो मैं कहती हूँ कि: मैं ने नमाज़ नहीं पढ़ी . . . ! तो इस बारे में शरीअत का प्रावधान क्या है ॽ क्या मेरे लिए ऐसी स्थिति में झूठ बोलना जइज़ है ॽ तथा मैं पिज़्ज़ा रेस्तरां में काम करता थी और यह रेस्तरां सूअर बेचता था इसलिए मैं ने उसे छोड़ दिया, और जब उसने मुझसे पूछा तो मैं ने उससे कहा कि उन्हों ने मुझे निकाल दिया है, तो इस स्थिति में भी शरीअत का दृश्य क्या है ॽ एक दूसरा मुद्दा यह है कि मैं अपनी माँ के साथ ट्रेन से एक दूसरे शहर का सफर करने वाली हूँ और ज़ुहर और अस्र की नमाज़ का समय ट्रेन ही में हो जायेगा, और उस समय मेरे लिए उनकी अदायगी करना संभव न होगा, तो फिर क्या करना होगा ॽ मैं ने सुना है कि नमाज़ों को एकत्र करके पढ़ना जाइज़ है, लेकिन मुझे नहीं पता कि कैसे . . .! क्या इसका मतलब यह है कि मेरे लिए ज़ुहर और अस्र की नमाज़ ज़ुहर की नमाज़ के समय पढ़ना संभव है, और इसे कैसे पढ़ा जायेगा ॽ यह बात निश्चित है कि मैं इशा और फज्र की नमाज़ भी पढ़ने पर सक्षम नहीं हूँगी क्योंकि मेरी माँ मेरे साथ होगी, तो फिर क्या करूँ ॽ क्या दूसरे समय में नमाज़ों की क़जा की जायेगी, और कैसे ॽ इसके अलावा, मेरी माँ मुझे हिजाब पहनने से भी रोकती है, और इस बात पर ज़ोर देती है कि मैं ऐसा पोशाक पहनूँ जो उस समाज और वातावरण के अनुकूल हो जिसमें मैं रहती हूँ, उदाहरण के तौर पर गर्मियों में मुझे छोटे कपड़े पहनने पर मजबूर करती है, और कहती है कि सूरज त्वचा के लिए उपयोगी है . . इन सब के बावजूद, मैं इन दबावों का विरोध करती हूँ, और यथा संभव शालीनता अपनाने का प्रयास करती हूँ, . . लेकिन मैं वास्तव में उस समय उदास और दुखी होती हूँ जब मैं अपनी माँ को देखती हूँ कि वह मुझसे गुस्सा करती है, लेकिन मैं भी अपने धर्म के सिद्धांतों को त्याग नहीं कर सकती, तो क्या आप कोई नसीहत करेंगेॽ ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419395/hi/hi/fatwa/एक_मुसलमान_लड़की_को_नसीहत_जिसे_उसके_घर_वाले_नमाज़_और_पर्दा_करने_से_रोकते_हैं]]></link>
      <pubDate>Fri, 29 Mar 2013 21:03:08 +0300</pubDate>
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      <title><![CDATA[ वह नयी नयी मुसलमान हुई है और अपने इस्लाम का प्रदर्शन करने पर सक्षम नहीं है तो वह अपने हिंदू परिवार - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ अल्लाह का शुक्र है मैं हाल ही में मुसलमान हुई हूँ, मैं एक हिंदू समाज में पली बढ़ी हूँ और निरंतर उसी में रह रही हूँ। यह माहौल मेरे लिए अपने नये धर्म के पालन के रास्ते में बहुत सी बाधाएं पैदा करता है, और यहाँ पर निश्चित रूप से मेरा प्रश्न नमाज़ के बारे में है, मेरे माता पिता बहुत कट्टरपंथी हैं और वे दोनों मुसलमानों के बारे में कुछ भी सुनना नहीं चाहते हैं, बजाय इसके कि उन्हें यह पता चले कि उनकी बेटी ने इस्लाम स्वीकार कर लिया है! इसलिए मैं उनसे इस मामले को गुप्त रखी हूँ, और समस्या यहाँ पर निहित है कि मैं घर में नमाज़ नहीं पढ़ सकती हूँ, घर बहुत छोटा है और उसमें कोई भी कुछ करता है तो उसमें उपस्थित सभी लोगों को उसका पता चल जाता है, एक बार मेरी माँ ने मुझे नमाज़ पढ़ते हुए देख लिया तो उसी समय से वह मुझ पर नियंत्रण कणा किए हुए है और मुझ पर पाबंदियाँ लगाती रहती है, यह तो घर का मामला है, रही बात आफिस की तो उसमें स्थिति और भी कठोर है, क्योंकि वहाँ किसी भी तरह से नमाज़ पढ़ना संभव नहीं है। इन सभी प्रतिबंधों को देखते हुए मैं वुज़ू करती हूँ और अपने आपको नमाज़ के लिए तैयार रखती हूँ और उसका समय होते ही अपनी मेज़ पर बैठी हुई नमाज़ पढ़ती हूँ। चुनाँचे नमाज़ की सभी कैफियतों को अपने दिल में अंजाम देती हूँ, रही बात घर की तो मैं सामान्य रूप से नमाज़ के लिए उचित समय की ताक में रहती हूँ, यदि मुझे अवसर मिल जाता है तो पढ़ लेती हूं, अन्यथा मैं लेटे हुए या बैठे हुए या इसके अलावा अन्य तरीक़े पर नमाज़ पढ़ती हूँ। स्थिति बहुत कठिन है, कभी कभी मैं नियमित रूप से नमाज़ पढ़ना शुरू करती हूँ कि अपनी माँ के आने की आवाज़ सुनती हूँ तो उसे खत्म करके दूसी चीज़ में व्यस्त होने पर मजबूर हो जाती हूँ, तो आपकी क्या सलाह है ॽ तथा मैं नमाज़ के अंदर सिर और दोनों हथेलियों को ढकने की अनिवार्यता को जानना चाहती हूँ, क्या यह अनिवार्य है ॽ तथा मेरी व्यक्तिगत स्थिति के बारे में क्या हुक्म है जबकि मैं ने आपके सामने अपनी स्थिति को स्पष्ट कर दिया है ॽ यदि मैं सिर और दोनों हथेलियों को ढके बिना नमाज़ पढ़ूँ तो क्या मेरी नमाज़ क़बूल होगी ॽ तथा यहाँ पर मैं आपको अपने बारे में इस तथ्य को बताना चाहती हूँ कि मैं बहुत सी कठिनाइयों और परेशानियों का सामना करती हूँ इसलिए नमाज़ के अंदर मैं बहुत आराम और सांस लेने का साधन पाती हूँ। ज्यों ही मैं नमाज़ पढ़ती हूँ और अल्लाह से दुआ करती हूँ तो मेरा सीना खुल जाता है और मेरे अंदर नये सिरे से आशा लौट आती है, किंतु मैं अरबी भाषा नहीं जानती हूँ, तो क्या मुझे अंग्रेज़ी भाषा में क़ुर्आन पढ़ने पर पुन्य मिलेगा ॽ इसी तरह मेरी अधिकांश नमाज़ भी अग्रेज़ी ही में होती है तो क्या वह क़बूल होगी ॽ मैं अभी अरबी भाषा सीखने की प्रक्रिया में हूँ और निकट भविष्य में इन - शा अल्लाह मेरी पूरी नमाज़ अरबी भाषा में होगी। मैं आप से नसीहत, सुझाव और सलाह के लिए अनुरोध करती हूँ, क्योंकि मेरे पास एक या दो के अलावा मुसलमान दोस्त नहीं हैं और वे भी धार्मिकता और धर्मनिष्ठा वाले नहीं हैं, तथा मैं जिस जगह रहती हूँ उसके कारीब कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ जाकर मैं अपने धर्म की शिक्षा प्राप्त कर सकूँ, मेरे लिए इंटरनेट ही एकमात्र साधन है, तथा मुझे यहाँ पर आपको इस सेवा पर धन्यवाद करना नहीं भूलना चाहिए जो आप प्रस्तुत कर रहे हैं, मैं ने इससे बहुत लाभ उठाया है।
 ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419391/hi/hi/fatwa/वह_नयी_नयी_मुसलमान_हुई_है_और_अपने_इस्लाम_का_प्रदर्शन_करने_पर_सक्षम_नहीं_है_तो_वह_अपने_हिंदू_परिवार]]></link>
      <pubDate>Fri, 29 Mar 2013 21:03:05 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ वह अल्लाह की ओर आमंत्रण देने के लिए एक इस्लामी रेडियो स्टेशन बनाना चाहता है, तो हम उसे क्या करने और - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ मैं मुसलमानों के लिए एक वैकल्पिक रेडियो स्टेशन बनाना चाहता हूँ, तथा मैं इस स्टेशन के माध्यम से मुसलमानों और ग़ैर मुसलमानों दोनों को आमंत्रित करना चाहता हूँ, अब तक मेरे विचार यह हैं कि : मैं संगीत वाद्य यंत्र से खाली गीत प्रस्तुत करूँ . . , तो क्या -कृपया- आप मुझे सलाह दे सकते हैं कि मेरे लिए क्या करना जाइज़ है और क्या जाइज़ नहीं है ॽ ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419389/hi/hi/fatwa/वह_अल्लाह_की_ओर_आमंत्रण_देने_के_लिए_एक_इस्लामी_रेडियो_स्टेशन_बनाना_चाहता_है,_तो_हम_उसे_क्या_करने_और]]></link>
      <pubDate>Fri, 29 Mar 2013 20:03:24 +0300</pubDate>
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      <title><![CDATA[ रमज़ान के बाद नसीहत - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ रमज़ान के बाद क्या नसीहत है ? ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419387/hi/hi/fatwa/रमज़ान_के_बाद_नसीहत]]></link>
      <pubDate>Fri, 29 Mar 2013 20:03:32 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ चोर के हाथ काटने और औरत की गवाही को मर्द की गवाही के आधा करार देने पर आपत्ति व्यक्त करना - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ प्रश्न: उस आदमी के बारे में आप का क्या विचार है जो कहता है: चोर का हाथ काटना और महिला की गवाही को पुरूष की गवाही के आधा करार देना, क्रूरता और नारी के अधिकार को हड़प करना है ॽ ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419385/hi/hi/fatwa/चोर_के_हाथ_काटने_और_औरत_की_गवाही_को_मर्द_की_गवाही_के_आधा_करार_देने_पर_आपत्ति_व्यक्त_करना]]></link>
      <pubDate>Fri, 29 Mar 2013 20:03:19 +0300</pubDate>
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    <item>
      <title><![CDATA[ वे मस्जिद में नमाज़ छोड़कर सभागार में पढ़ना चाहते हैं ताकि ग़ैर मुसलमान लोग उस से प्रभावित हों ! - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ मैं जिस विश्वविद्यालय में पढ़ता हूँ उसमें हम प्रति वर्ष एक निमंत्रण संबंधी सप्ताह संगठित करते हैं, जहाँ हम विश्वविद्यालय में गैर मुसलमानों को विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल करके आमंत्रित करते हैं। इस वर्ष प्रबंधकों ने एक न्या विचार पेश किया है और उन्हों ने यह प्रस्ताव रखा है कि हम एक नमाज़ मस्जिद के बदले विश्वविद्यालय के एक हॉल में पढ़ें, इसका मक़सद इस्लाम के प्रतीकों का प्रदर्शन है, फिर इसके बाद वे इस्लाम के बारे में अधिक प्रश्न करेंगे, किंतु मैं वास्तव में इस तरीक़े की वैधता से संतुष्ट नहीं हूँ, क्योंकि यदि यह सफल रहा तो आने वाले वर्षों में दोहराया जायेगा। तो इस तरह के काम का क्या हुक्म है ? और क्या अगर यह प्रति वर्ष किया जाये तो बिद्अत की गणना में आयेगा ?
 ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419383/hi/hi/fatwa/वे_मस्जिद_में_नमाज़_छोड़कर_सभागार_में_पढ़ना_चाहते_हैं_ताकि_ग़ैर_मुसलमान_लोग_उस_से_प्रभावित_हों_!]]></link>
      <pubDate>Fri, 29 Mar 2013 20:03:19 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ एक ईसाई औरत अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जन्मदिन के बारे में प्रश्न करती है और मुसलम - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जिस दिन पैदा हुए उसका क्या महत्तव है, तथा उस दिन को कब और कैते मनाया जाता है ? ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419381/hi/hi/fatwa/एक_ईसाई_औरत_अल्लाह_के_नबी_सल्लल्लाहु_अलैहि_व_सल्लम_के_जन्मदिन_के_बारे_में_प्रश्न_करती_है_और_मुसलम]]></link>
      <pubDate>Fri, 29 Mar 2013 20:03:20 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ इस्लाम में परिवार का स्थान - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ इस्लाम परिवार, तथा पुरूषों, महिलाओं और बच्चों के योगदान के बारे में क्या दृष्टि कोण रखता है ? ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419379/hi/hi/fatwa/इस्लाम_में_परिवार_का_स्थान]]></link>
      <pubDate>Fri, 29 Mar 2013 20:03:29 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ वह इस्लाम स्वीकारना चाहती है और उसका पति इंकार करता है - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ मैं एक अवधि से इस्लाम को व्यवहार में ला रही हूँ और यदि अल्लाह ने चाहा तो मैं उसे स्वीकार करने की इच्छा रखती हूँ, लेकिन मुझे कुछ खतरनाक समस्याओं का सामना है। मैं और मेरे पति एक अवधि से वैवाहिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, बावजूद इसके कि मामला ठीक ठाक चल रहा है किंतु मै सुनिश्चित नहीं हूँ कि स्थिति सदा इसी तरह बनी रहेगी क्योंकि उसे सख्त क्रोध के दौरे पड़ते हैं, और जब से हमारे वकील ने मुझे इसकी सलाह दी है, मैं गंभीरता से उससे अलग होने के बारे में सोच रही हूँ।
समस्या यह है कि अब मुझे उससे प्यार नहीं है, इसके अलावा वह मुझे इस्लाम स्वीकारने से रोकता है तथा वह स्वयं भी इस्लाम स्वीकार करने से इनकार करता है, और उसका कहना है कि वह मेरे इस्लाम क़बूल करने पर हमारे अलग हो जाने को प्राथमिकता देगा। दूसरी समस्या यह है कि मेरे पास दो बेटियाँ हैं जो एक हिंदू स्कूल में पढ़ रही हैं, तो मेरे इस्लाम में प्रवेश करने के बाद उन दोनों से संबंधित शरीअत का हुक्म (प्रावधान) क्या है। मेरी मुलाक़ात एक मुसलमान व्यक्ति से हुई है जिससे मैं प्यार करती हूँ और वह भी मुझे बहुत प्यार करता है, वह मुझसे दो बार शादी करने का अनुरोध कर चुका है, ज्ञात रहे कि मैं उसके साथ नहीं सेती हूँ और न ही इसतरह की कोई चीज़ मेरे दिल में है। और वह मेरी दोनों बेटियों को स्वीकार करने के लिए तैयार है यदि वे दोनों भी इस्लाम में प्रवेश कर लेती हैं। उसने कहा है कि वह साल के अंत तक प्रतीक्षा करेगा उसके बाद वह अपने मामले में व्यस्त हो जायेगा, क्योंकि कुछ अन्य महिलाएं भी हैं जिनके साथ वह घर बसा सकता है, परंतु वह मुझे उनपर प्राथमिकता देता है। मुझे बहुत सी चीज़ों के अंदर अपने मामले में सावधानी और दूरदर्शिता से काम लेने की आवश्यकता है, इसके होते हुए भी में अपने पति के प्रति खेद और पाप का आभास करती हूँ, क्योंकि वह हमारे विवाह को सफल बनाने की चेष्टा करता है। लेकिन खेद की बात यह हैं कि धर्म बहुत बड़ी रूकावट बनता है। ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419371/hi/hi/fatwa/वह_इस्लाम_स्वीकारना_चाहती_है_और_उसका_पति_इंकार_करता_है]]></link>
      <pubDate>Fri, 29 Mar 2013 20:03:43 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ वह इस्लाम से बहुत क़रीब है - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ मैं एक हिंदू हूँ, मेरे अंदर इस्लाम के प्रति मज़बूत रूझान और झुकाव पैदा हो गया है। आपकी वेबसाइट की तरह वेबसाइट पृष्ठ मेरे जैसे लाखों युवाओं के लिए अल्लाह की ओर से एक दया है। निकट ही यदि अल्लाह की इच्छा हुई तो मैं इस्लामी दुनिया से अपनी संबंद्धता की घोषणा करूँगा। आशा है कि आप मेरे लिए इस्लाम धर्म में प्रवेश करने के लिए दुआ करेंगे। तथा मुझे आशा है कि - अल्लाह की तौफीक़ से - ये अच्छे कार्य जिसे आप जैसे लोग अंजाम दे रहे हैं, जारी रहेंगे। ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419289/hi/hi/fatwa/वह_इस्लाम_से_बहुत_क़रीब_है]]></link>
      <pubDate>Thu, 28 Mar 2013 20:03:26 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ एक मुसलमान किसी काफिर महिला को इस्लाम का निमंत्रण किस प्रकार देगा ? - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ मैं जिस विश्वविद्यालय में पढ़ता हूँ उसमें मुसलमानों की असंख्या अधिक नहीं है। यहाँ तक कि जो मुसलमान वहाँ मौजूद हैं उनके पास दीन का अधिक ज्ञान नहीं है। विश्वविद्यालय में मेरे अधिकांश ग़ैर मुस्लिम मित्र मुझसे इस्लाम के बारे में प्रश्न करते रहते हैं, और यह आमतौर पर हमारे बीच लोगों से हटकर एकांत में होता है, तो क्या उन्हें इस्लाम से संतुष्ट करने के उद्देश्य से ऐसा करना जाइज़ है ? ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419287/hi/hi/fatwa/एक_मुसलमान_किसी_काफिर_महिला_को_इस्लाम_का_निमंत्रण_किस_प्रकार_देगा_?]]></link>
      <pubDate>Thu, 28 Mar 2013 20:03:11 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ इस्लाम स्वीकार करना चाहता है और अरबी भाषा नहीं जानता है - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ मैं ने आप की साइट पर कई प्रश्न पढ़े हैं जिन में आप गैर मुस्लिमों के प्रश्नों के उत्तर देते हैं, और मैं इस बात से सन्तुष्ट हूँ कि अल्लाह एक है और उस के ईश्दूत मुहम्मद अन्तिम सन्देष्टा हैं, मेरा प्रश्न यह है कि : मैं इस धर्म में कैसे प्रवेश करूँ, और मैं नमाज़ कैसे अदा करूँ जबकि मैं अरबी भाषा नहीं जानता हूँ, और क्या मैं अपना नाम बदल दूँ? ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419283/hi/hi/fatwa/इस्लाम_स्वीकार_करना_चाहता_है_और_अरबी_भाषा_नहीं_जानता_है]]></link>
      <pubDate>Thu, 28 Mar 2013 20:03:28 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ इस्लाम की सहिष्णुता - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ ग़ैर-मुस्लिमों के लिए हम इस्लाम की सहिष्णुता को कैसे प्रमाणित करें और यह कि वह एक आसान धर्म है ॽ ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419281/hi/hi/fatwa/इस्लाम_की_सहिष्णुता]]></link>
      <pubDate>Thu, 28 Mar 2013 20:03:08 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ इस्लाम में प्रवेष करना आसान है - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ मेरे पिता अफ्रीक़ी असल से एक अमेरिकी हैं और मेरी श्वेत में से है, मैं ने इस धर्म के बारे में गहन खोज किया है, मेरी आयु 16 वर्ष है, मैं वास्तव में एक मुसलमान बनना चाहता हूँ, मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या वाक़ई मैं मुसलमान बन सकता हूँ ? ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419277/hi/hi/fatwa/इस्लाम_में_प्रवेष_करना_आसान_है]]></link>
      <pubDate>Thu, 28 Mar 2013 20:03:49 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ इस्लाम और मुसलमान - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ इस्लाम धर्म और मुस्लिम धर्म के बीच क्या अंतर है, या वे दोनों एक ही चीज़ हैं ॽ ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419273/hi/hi/fatwa/इस्लाम_और_मुसलमान]]></link>
      <pubDate>Thu, 28 Mar 2013 20:03:13 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ इस्लाम में प्रवेश करने के इच्छुक व्यक्ति के लिए प्रारंभिक बिंदु - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ मैं जानना चाहता हूँ कि क्या सत्य धर्म इस्लाम में रूचि रखने वाले व्यक्ति के लिए कोई प्रारंभिक बिंदु है क्योंकि मुझे बहुत से अलग अलग उत्तर प्राप्त हुए हैं ॽ ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419263/hi/hi/fatwa/इस्लाम_में_प्रवेश_करने_के_इच्छुक_व्यक्ति_के_लिए_प्रारंभिक_बिंदु]]></link>
      <pubDate>Thu, 28 Mar 2013 19:03:18 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ एक गैर मुस्लिम अनुसंधान कर्ता जिब्रील अलैहिस्सलाम के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से बात चीत कर - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ मैं संयुक्त राज्य (अमेरिका) में एक कालेज में पढ़ता हूँ। और मैं आप से यह प्रश्न इस लिये कर रहा हूँ ताकि मैं उस से अपने अनुसंधान (और उस ने विषय का नाम उल्लेख किया) में लाभान्वित हो सकूँ। आप लोगों के पास इस बात का प्रमाण (सबूत) क्या है कि जिब्रील (अलैहिस्सलाम) ने मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से बात चीत की है ? ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419261/hi/hi/fatwa/एक_गैर_मुस्लिम_अनुसंधान_कर्ता_जिब्रील_अलैहिस्सलाम_के_नबी_सल्लल्लाहु_अलैहि_व_सल्लम_से_बात_चीत_कर]]></link>
      <pubDate>Thu, 28 Mar 2013 19:03:41 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को बुरा-भला कहने वाले का खंडन करना अनिवार्य है - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ हम में से कोई व्यक्ति इस बात से अनभिज्ञ नहीं है जो ईसाई लोग नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को बुरा-भला कहते हैं, तथा हम इस्लामी समुदाय के युवाओं की अपने धर्म और अपने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के प्रति ग़ैरत (आत्म सम्मान) से भी हम अपरिचित नहीं हैं, तो क्या नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को गाली देने वाले (बुरा भला कहने वाले) का वक्ता को बुरा भला कहकर खंडन करना जाइज़ है, ज्ञात रहे कि मैं ने एक ऐसे ही व्यक्ति को बुरा भला कहा, तो मुझे मेरे एक निकटवर्ती ने दुबारा ऐसा न करने की सलाह दी, क्योंकि इसके कारण वे और अधिक दुर्वचन और उपहास व अपमान करेंगे, और उनका गुनाह मेरे ऊपर होगा। ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419259/hi/hi/fatwa/नबी_सल्लल्लाहु_अलैहि_व_सल्लम_को_बुरा-भला_कहने_वाले_का_खंडन_करना_अनिवार्य_है]]></link>
      <pubDate>Thu, 28 Mar 2013 19:03:17 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ लेन देन के अध्याओं और इस्लामी बैंकिंग के प्रावधानों में निपुणता कैसी पैदा की जाए ॽ - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ आप से अनुरोध है कि इस्लामी बैंकिंग के बारे में किसी प्रामाणिक पुस्तक की सिफारिश करें ताकि मैं किसी नौकरी के लिए आवेदन करते या किसी व्यापारिक अनुबंध में प्रवेश करते समय इस बात को जानने पर सक्षम हो सकूँ कि जिस बैंक के साथ मैं लेन देन कर रहा हूँ वह वास्तव में एक इस्लामी बैंक है। ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419257/hi/hi/fatwa/लेन_देन_के_अध्याओं_और_इस्लामी_बैंकिंग_के_प्रावधानों_में_निपुणता_कैसी_पैदा_की_जाए_ॽ]]></link>
      <pubDate>Thu, 28 Mar 2013 19:03:26 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ क़ुरआन करीम का पाठ सीखने की विधि - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ मैं क़ुरआन करीम की अच्छी तरह तिलावत करने और उसे याद (कंठस्थ) करने पर सक्षम नहीं हूँ, तो अच्छी तरह क़ुर्आन तिलावत करने तथा उसे याद करने का तरीक़ा क्या है ? जबकि ज्ञात रहे कि हमें शिक्षा देने वाला और हमें पढ़ाने वाला कोई उपलब्ध नहीं है और हम बड़े हो चुके हैं। ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419253/hi/hi/fatwa/क़ुरआन_करीम_का_पाठ_सीखने_की_विधि]]></link>
      <pubDate>Thu, 28 Mar 2013 19:03:57 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ वह अपनी गरीबी के कारण जन्म नियन्त्रण करना चाहता है - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ क्या मुझे ठहर जाना चाहिए और इस बात की कोशिश नहीं करनी चाहिए कि मेरे बच्चे पैदा हूँ, क्योंकि मुझे डर है कि अल्लाह तआला मुझे जो बच्चे देगा मैं उन के लिए परिवार में एक इस्लामी वातावरण (माहौल) उपलब्ध नहीं कर सकूंगा ? मेरे ऊपर पिछले ऋण हैं जिन्हें मैं चुका रहा हूँ, उस पर जो सूद बढ़ता है वह अतिरिक्त है। मैं सोचता हूँ कि मेरे लिए उपयुक्त यह है कि बच्चे पैदा करने से रूका रहूँ यहाँ तक कि मैं क़र्ज़ का भुगतान कर दूँ। तो इस विषय में आप के क्या विचार हैं ? ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419249/hi/hi/fatwa/वह_अपनी_गरीबी_के_कारण_जन्म_नियन्त्रण_करना_चाहता_है]]></link>
      <pubDate>Thu, 28 Mar 2013 19:03:24 +0300</pubDate>
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    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ अल्लाह के बारे में शैतानी वस्वसों से पीड़ित है - हिन्दी ]]></title>
      <description><![CDATA[ एक आदमी के दिल में अल्लाह अज़्ज़ा व जल्ल के बारें में शैतान भयानक वस्वसे डालता रहता है, और वह इस से भयभीत है, ऐसी स्थिति में उसे क्या करना चाहिए? ]]></description>
      <link><![CDATA[http://www.islamhouse.com/419245/hi/hi/fatwa/अल्लाह_के_बारे_में_शैतानी_वस्वसों_से_पीड़ित_है]]></link>
      <pubDate>Thu, 28 Mar 2013 19:03:48 +0300</pubDate>
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    </item>
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