Winners of the Tenth Cultural Competition of Ramadan in Indian, 1430 AH | इस्लाम के विषय में जानें | Hindi Fonts
इस्लाम से निष्कासित ‹खारिज› करने वाली बातें
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अब यह ज्ञात हो गया है कि ग्रहण एक सामान्य प्रक्रिया है जो एक ऐसी अवधि में होता है जिस में चाँद, सूरज और पृथ्वी के बीच में आ जाता है। (जिस के घटित होने का समय पहले से जाना जा सकता है).
तो फिर नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उस समय नमाज़ क्यों पढ़ते थे ? हालांकि यह किसी नुक़सान का कारण नहीं बनता है।
इस पुस्तक में, प्रमणित हदीसों की रोश में तकबीर कहने से लेकर सलाम फेरने तक नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा़ संछिप्त रूप में प्रस्तुत किया गया है।
काफिरों को उनके त्यौहारों की बधाई देने का क्या हुक्म है?
नए हिज्री वर्ष के अवसर पर "कुल्लो आमिन् व अन्तुम बिख़ैर" (अर्थात तुम हर वर्ष कुशल मंगल रहो) कहते हुए या आशीर्वाद की प्रार्थना (कामना) करते हुए बधाई देने का क्या हुक्म है, इसी तरह कोई संदेश या ग्रीटिंग कार्ड भेजना जिस में प्रेषित के लिए उस के नए वर्ष में भलाई और आशीर्वाद की दुआ करना।
वेश्विक धर्मों में पूज्य की धारणाः इस धरती पर मानवजाति अनेक पूजा पत्रों की उपासना और आराधना करती है, बल्कि वस्तुस्थिति यह है कि एक ही धर्म के मानने वालों में कई पूज्यो की धारणा पाई जाती है, किन्तु वास्तविकता यह है कि धर्म के मूल ग्रंथों के अध्य्यन से यह स्पष्ट होता है कि हर धर्म में केवल एक ही पूज्य की धारणा मिलती है। इस वीडियो में वेश्विक धर्मों जैसे किः हिन्दुमत, सिखमत, ईसाई-धर्म, यहूदी-धर्म, पारसी धर्म... के मूल ग्रंथों के हवालों से यह प्रमाणित और सिद्ध किया गया है कि सभी धर्मों में केवल एक पूज्य की उपासना का आदेश दिया गया है।
साथ ही साथ इस में श्रोता विशेष कर गैर-मुस्लिमों के विभन्न प्रकार के प्रश्नों का उत्तर दिया गया है।
इस्लाम के शत्रु निरंतर यह राग अलापते रहे हैं कि इस्लाम ने महिलाओं पर अत्याचार किया है और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित कर दिया है। किन्तु यह मिथ्यारोप अतिशीघ्र ही निराधार होकर धराशायी हो जाता है जब हम इस बात से अवगत होते हैं कि इस्लाम ने किस प्रकार महिलाओं को सम्मान प्रदान किया है? समस्त परिस्थितियों में उन के साथ न्याय किया है और उन्हें वो अधिकार प्रदान किये हैं जिनकी वह इस से पूर्व कल्पना भी नहीं कर सकती थी। वास्तविकता यह है कि स्वयं नारी की स्वतंत्रता अधिकारों का आहवान करने वालों ने उसका अपमान किया है। इस वीडियो में इस्लाम के निकट विभिन्न छेत्रों में नारी के अधिकारों का उल्लेख किया गया है।
मैं एक कर्मचारी हूँ, मेरा मासिक वेतन 2,000 सऊदी रियाल है। परिवार के सभी सदस्य मेरे ऊपर निर्भर करते हैं और सभी खर्चे मैं अपने वेतन से देता हूँ। मेरे पास एक पत्नी, एक बेटी, मेरे मात पिता और भाई भहनें हैं जिन पर मैं खर्च करता हूँ।
लेकिन प्रश्न यह है कि मैं अपने माल की ज़कात कैसे दूँ जबकि मेरे धन का स्रोत केवल मेरा वेतन है, परन्तु मेरा संपूर्ण वेतन मेरे परिवार पर खर्च हो जाता है ? इसलिए मैं अपनी ज़कात कब दूँ ? कुछ लोगों का कहना है कि वेतन खेती की तरह है, उस में एक साल के बीतने का ऐतिबार नहीं है, इसलिए जब भी वेतन प्राप्त हो उस में ज़कात अनिवार्य है।
इस्लाम ही एकमात्र धर्म है जिसे अल्लाह तआला ने सर्व मानवजाति के लिए चयन किया है, जिसके अतिरिक्त कोई अन्य धर्म अल्लाह के निकट मान्य नहीं है। तथा इस्लाम ही एकमात्र धर्म है जो हमारी आज की दुनिया की समस्त समस्याओं का समाधान पेश करता है और उसके निर्देशों का पालन करके और उन्हें व्यवहार में लाकर मानवता समस्यारहित जीवन का अनुभव कर सकती है। इस पुस्तक में इस्लाम के अनन्त संदेश, उसकी विशेषताओं और गुणों, तथा जीवन के सभी छेत्रों में उसकी शिक्षाओं, मार्गदर्शनों और निर्देशों का उल्लेख किया गया है।
इस लेख में मुहर्रम के महीने और विशिष्ट रूप से उसकी दसवीं तारीख (आशूरा के दिन) की फज़ीलत, महत्व और उस दिन रोज़ा रखने के अज्र व सवाब और प्रतिफल का उल्लेख किया गया है। साथ ही साथ आत्म-निरीक्षण (नफ्स के मुहासबा) के महत्व को स्पष्ट किया गया है, विशेषकर नये वर्ष के प्रारम्भ पर।
अल्लाह का महीना मुहर्रमुल-हराम एक महान और हुर्मत वाला महीना है, जिसे अल्लाह तआला ने आकाश एंव धरती की रचना करने के समयं ही से हुर्मत –सम्मान एंव प्रतिष्ठा- वाला घोषित किया है, तथा यह हिज्री-वर्ष का प्रथम महीना है। इस लेख में इस महीने की विशेषता तथा इस में करने योग्य कार्य का उल्लेख किया गया है।
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