रजब के महीने को अन्य महीनों पर कोई विशेषता नहीं प्राप्त है, इसके बावजूद बहुत सारे मुसलमान विशेष रूप से इस महीने में ऐसी विभिन्न इबादतें करते हैं जिन का इस्लाम में कोई आधार नहीं है, और वह सारी चीज़ें बिद्आत की गणना में आती हैं, जिन से बचाव करना अनिवार्य है। इस लेख में रजब के महीने में की जाने वाली बिदआत का उल्लेख करते हुए खण्डन किया गया है।
उसमान बिन अफ्फान रज़ियल्लाहु अन्हु के जीवन की कुछ झलकियाँ : इस लेख में मुसलमानों के तीसरे खलीफी उसमान बिन अफ्फान रज़ियल्लाहु अन्हु की जीवनी, आपकी विशेषताओं और महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में कुछ झलकियाँ प्रस्तुत की गई हैं।
मुसलमान लोग यह गुमान क्यों करते हैं कि उन्हीं का धर्म सच्चा है? क्या उनके पास इसके संतोषजनक कारण हैं?
मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आगमन की पूर्व सूचना हमें बाइबल, तौरेत और अन्य धर्म ग्रन्थों में मिलती है, यहाँ तक कि भारतीय धर्मग्रम्थों में भी आप के आने की भविष्यवाणियाँ मिलती हैं। हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म की पुस्तकों में इस प्रकार की पूर्व-सूचनाएँ मिलती हैं। इस पुस्तिका में सब को अकत्र करके पेश करने का प्रयास किया गया है। और यह सिद्ध किया गया है कि जिस नराशंस या कल्कि अवतार के आगमन का उनके धर्मग्रन्थों में उल्लेख हुआ है और उसकी जो विशेषतायें वर्णित हुई हैं, वह इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ही हैं। इसलिए जीवन की सुगम, सार्थक, सफल और फलदाई यात्रा के लिए अल्लाह के अन्तिम पैग़म्बर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के द्वारा पेश की गई शिक्षाओं को अपनाया जाए और उनके बताये हुए मार्ग पर चला जाए।
क़ादियानियत की हक़ीकत : यह पुस्तक क़ादियानियत के असली चेहरे को बेनक़ाब करती है, जो मुस्लिम समाज में घुस कर अपने आप को एक सच्चे मुसलमान के रूप में पेश करते हैं और अपने दुष्ट इरादों को छुपाये रखते हैं, जिसके कारण सीधे-साधे कम इल्म वाले मुसलमान आसानी से उनके झांसे में आ जाते हैं। जबकि इनके इरादे बड़े भयानक और खतरनाक हैं, इसलिए आम मुसलमानों को इन से अवगत कराना आवश्यक है। प्रस्तुत किताब का उद्देश्य यही है, जिसमें क़ादियानियत के संस्थापक की संक्षिप्त जीवनी, क़ादियानियत के अक़ाईद (आस्थाओं और मान्यताओं) मिज़ाZ गुलाम अहमद के दावों, इल्हामात, तावीलों, भविष्यवाणियों, मुसलमानों के बारे में उनके अक़ीदे, जिहाद और हज्ज के प्रति उनके रवैये का खुलासा करते हुए, क़ादियानियत की हक़ीक़त का फर्दा फाश किया गया है।
प्रस्तुत पुस्तक एक संग्रह है 80 ऐसी औरतों की कहानियों का जो अधिकांश यूरोप और अमेरिका से संबंध रखती हैं। इन सौभाग्यशाली महिलाओं को वास्तव में सच्चाई की तलाश थी और उन्हों ने गहन अध्ययन, सोच-विचार और संतुष्टि के बाद इस्लाम ग्रहण किया। इस्लाम स्वीकारने के बाद आज़माइशों और संकटों ने इनका रास्ता रोकने की कोशिश की, मगर ये साहसी महिलायें पहाड़ के समान अपने फैसले पर जमी रहीं। यह किताब सत्य के खोजियों के लिये मील का पत्थर सिद्ध होगी।
इस्लाम धर्म एक संपूर्ण व्यापक धर्म है जो जीवन के सभी छेत्रों को घेरे में लिये हुये है। मानव जीवन का कोई ऐसा छेत्र नहीं है जिसके बारे में इस्लाम के अंदर कोई मार्गदर्शन मौजूद न हो। प्रस्तुत लेख में इस्लामी शिष्टाचार के कुछ पहलुओं को उजागर किया गया है जिन से सुसज्जित होने का इस्लाम ने मुसलमानों को आदेश किया है, उदाहरण स्वरूप खान-पान के आदाब, सोने जागने के आदाब, बैठक और सभा के आदाब, शौच के आदाब, यात्रा के आदाब...इत्यादि।
मैं ने पढ़ा है कि वो बरतन, चम्मच और चाकू जिन में सुअर का मांस लग गया हो, उन्हें सात बार पानी से और एक बार मिट्टी से धोना अनिवार्य है। क्या यह सहीह है?
इस हुक्म का आधार किस हदीस पर है? क्या बरतनों को एक बार साबुन से धोना प्रयाप्त नही है?
जब मैं छोटी थी तो मैं ने अपने परिवार वालों के साथ विदेश का सफर किया, यात्रा के दौरान हमें सुअर तत्व युक्त बिस्कुट दिया गया। जब मेरी मां को इसका पता चला तो उन्हों ने हमें खाने से रोक दिया। जैसाकि मुझे याद आ रहा है कि हम ने अपने हाथ और मुँह पानी और मिट्टी से (एक बार मिट्टी समेंत सात बार) नहीं धुले थे। जैसाकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का आदेश है कि जब कोई व्यक्ति सुअर या उसका कोई भाग छू लेने पर करे। कुछ वर्षों के बाद मैं अपने देश से बाहर थी और गलती से पोर्क खा लिया और अपने मुँह को पानी और मिट्टी से नहीं धोया। ये दोनों मामले कुछ वर्षों पहले पेश आये थे। मेरे मुँह या हाथ पर सुअर का कोई प्रभाव, स्वाद, या गंध या रंग बाक़ी नहीं था, तो क्या अब ज़रूरी है कि हम उन्हें धुल लें। मुझे भय है कि इन दोनो मामलों के कारण अल्लाह हमारी नमाज़ को नहीं करेगा। कृप्या इसका स्पष्टीकरण करें।
मैं माल्टा में रहने वाला एक अरब मूल का व्यक्ति हूँ, मैं सुअर के मांस के निषिध होने का कारण जानना चाहता हूँ, क्योंकि मेरे साथ काम करने वाले दोस्तों ने मुझ से इसके बारे में पूछा है।